बहन भाई का सबसे प्रमुख त्योहार है। इस दिन की तैयारी बहनें बहुत दिनों पहले ही प्रारंभ कर दिया करती है। बहने भाई की कलाई पर राखी बांध कर अपनी रक्षा का वचन लेती हैं। और भाई भी अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है।
यह पर्व भी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है क्योंकि यह त्योहार दिवाली के तुरंत बाद ही आता है। इस दिन भी बहने अपने भाई को अपने घर से बना खाना खिलाकर अपनी रक्षा का वादा अपने भाई से लेती है।
विचारणीय प्रश्न ???
क्या हम अपनी बहन की रक्षा कर सकते हैं ?
क्या हम घर पर रहकर अपनी बहनों की जीवन रक्षा करने में समर्थ है ???
क्या शास्त्रों में कहीं पर वर्णित है इन क्रियाओं का ???
उपरोक्त प्रश्न सत्य है। क्योंकि हमारे धर्म ग्रंथ मे ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि बहन भाए को खाना खिलाने से भाई उसकी रक्षा कर पाएगा। यह सब एक रणनीति के तौर पर ऐसा किया गया है। क्योंकि ऐसा नहीं होता तो आज यह धर्म के ठेकेदार बेरोजगार मिलते। इनको स्वयं यह ज्ञान नहीं है कि हमारे धर्म ग्रंथ क्या बता रहे हैं और हम क्या कर रहे हैं। रक्षाबंधन, भाई दुज आदि पर्व मनाने से हम किसी की रक्षा नहीं कर सकते हैं। हमारी रक्षा तो परम अक्षर ब्रह्म अर्थात कबीर परमेश्वर जी द्वारा हि हो सकती हैं। वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज ही एक पूर्ण संत हैं जो यथार्थ भक्ति से मानव जीवन का कल्याण कर रहे हैं और समाज में फेली कुरीतियों को नाश कर रहे हैं। जो ज्ञान आज तक किसी ने नहीं बताया था वह तत्व ज्ञान संत रामपाल जी महाराज बता रहे हैं कि हमारी रक्षा तो उस पूर्ण परमात्मा की शरण मे जाने से ही सभंव होगी।


















