Eternal Power

Wednesday, August 5, 2020

भाई दुज

हमारे देश में प्रत्येक महीने में कोई ना कोई त्योहार मनाया जाता है। और प्रत्येक त्योहार आपसी रिश्ते से गहरे जुडे होते है। प्रत्येक पर्व बडे ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। जिसकी वजह से भारत को उत्सवों का देश भी कहा जाता है। इसी प्रकार देश में बहन भाई जैसे पवित्र रिश्ते के लिए भी देश मे रक्षाबंधन और भाई दुज का त्योहार बडी प्रमुखता से मनाया जाता है। 
रक्षाबंधन पर्व
बहन भाई का सबसे प्रमुख त्योहार है। इस दिन की तैयारी बहनें बहुत दिनों पहले ही प्रारंभ कर दिया करती है। बहने भाई की कलाई पर राखी बांध कर अपनी रक्षा का वचन लेती हैं। और भाई भी अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है।
भाई दुज
यह पर्व भी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है क्योंकि यह त्योहार दिवाली के तुरंत बाद ही आता है। इस दिन भी बहने अपने भाई को अपने घर से बना खाना खिलाकर अपनी रक्षा का वादा अपने भाई से लेती है।
विचारणीय प्रश्न ???
क्या हम अपनी बहन की रक्षा कर सकते हैं ?
क्या हम घर पर रहकर अपनी बहनों की जीवन रक्षा करने में समर्थ है ???
क्या शास्त्रों में कहीं पर वर्णित है इन क्रियाओं का ???
उपरोक्त प्रश्न सत्य है। क्योंकि हमारे धर्म ग्रंथ मे ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि बहन भाए को खाना खिलाने से भाई उसकी रक्षा कर पाएगा। यह सब एक रणनीति के तौर पर ऐसा किया गया है। क्योंकि ऐसा नहीं होता तो आज यह धर्म के ठेकेदार बेरोजगार मिलते। इनको स्वयं यह ज्ञान नहीं है कि हमारे धर्म ग्रंथ क्या बता रहे हैं और हम क्या कर रहे हैं। रक्षाबंधन, भाई दुज आदि पर्व मनाने से हम किसी की रक्षा नहीं कर सकते हैं। ह
मारी रक्षा तो परम अक्षर ब्रह्म अर्थात कबीर परमेश्वर जी द्वारा हि हो सकती हैं। वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज ही एक पूर्ण संत हैं जो यथार्थ भक्ति से मानव जीवन का कल्याण कर रहे हैं और समाज में फेली कुरीतियों को नाश कर रहे हैं। जो ज्ञान आज तक किसी ने नहीं बताया था वह तत्व ज्ञान संत रामपाल जी महाराज बता रहे हैं कि हमारी रक्षा तो उस पूर्ण परमात्मा की शरण मे जाने से ही सभंव होगी।

Wednesday, July 15, 2020

नाग पुजा कितनी लाभदायक है ?

                           नाग पुजा
नाग पंचमी
सर्प

भगवान शिव का प्रिय महीना सावन चल रहा है। सावन का महीना हिंदू धर्म के मानने वालों के लिए बहुत खास होता है। ऐसा माना जाता है कि इस महीने में भगवान शिव शिवलिंग में निवास करते हैं। सप्ताह के सोमवार शंकर भगवान को समर्पित माने गए हैं और सावन में इस दिन की मान्यता और बढ़ जाती है। सावन का महीना आते ही भारतीय त्योहारों का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। सावन में नाग पंचमी का पर्व भी मनाया जाता है।

  • क्या आवश्यक है नाग पूजा ?

भगवान शिव अपने आभूषण के तौर पर नाग को धारण करते हैं। सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग देव की पूजा करने की रिवायत है। नागपंचमी के दिन भगवान शिव की खास पूजा की जाती है और सावन का सोमवार होने की स्थिति में लोग उनका आशीर्वाद लेने शिवालय भी जाते हैं।
नाग देल
सर्प व सपेरा

  • शास्त्र अनुसार साधना हैं नाग पुजा ?

भारत देश कृषिप्रधान देश था और है। सांप खेतों का रक्षण करता है, इसलिए उसे क्षेत्रपाल कहते हैं। जीव-जंतु, चूहे आदि जो फसल को नुकसान करने वाले तत्व हैं, उनका नाश करके सांप हमारे खेतों को हराभरा रखता है।
नाग देवता
नाग पुजा

साँप हमें कई मूक संदेश भी देता है। साँप के गुण देखने की हमारे पास गुणग्राही और शुभग्राही दृष्टि होनी चाहिए। भगवान दत्तात्रय की ऐसी शुभ दृष्टि थी, इसलिए ही उन्हें प्रत्येक वस्तु से कुछ न कुछ सीख मिली।
साँप सामान्यतया किसी को अकारण नहीं काटता। उसे परेशान करने वाले को या छेड़ने वालों को ही वह डंसता है। साँप भी प्रभु का सर्जन है, वह यदि नुकसान किए बिना सरलता से जाता हो, या निरुपद्रवी बनकर जीता हो तो उसे मारने का हमें कोई अधिकार नहीं है। जब हम उसके प्राण लेने का प्रयत्न करते हैं, तब अपने प्राण बचाने के लिए या अपना जीवन टिकाने के लिए यदि वह हमें डँस दे तो उसे दुष्ट कैसे कहा जा सकता है? हमारे प्राण लेने वालों के प्राण लेने का प्रयत्न क्या हम नहीं करते? लेकिन शास्त्रों में कहीं पर भी इस तरह की साधना का प्रावधान नहीं है।
नाग देवता
नागदेव

  • सही भक्ति क्या है ?

वेदों में, और गीता जी,कुरान, बाइबल आदि धर्म ग्रंथों में बताई गई साधना ही शास्त्र अनुकूल है। इनके अतिरिक्त अन्य कोई भी साधना करना व्यर्थ है। आज तक जितने भी ऋषि, मह्रिषी, पंडित आदि हुए हैं वो इनके विपरीत ज्ञान देकर गलत साधना से करोड़ों मानव जाती को अंधकार में धकेल दिया है। परन्तु परमात्मा अपनअपने सत ज्ञान के लिए स्वयं आते हैं या अपना अंश धरती पर भेजते हैं। वर्तमान में भारत देश कृषिप्रधान देश था और है। सांप खेतों का रक्षण करता है, इसलिए उसे क्षेत्रपाल कहते हैं। जीव-जंतु, चूहे आदि जो फसल को नुकसान करने वाले तत्व हैं, उनका नाश करके सांप हमारे खेतों को हराभरा रखता है।
साँप हमें कई मूक संदेश भी देता है। साँप के गुण देखने की हमारे पास गुणग्राही और शुभग्राही दृष्टि होनी चाहिए। भगवान दत्तात्रय की ऐसी शुभ दृष्टि थी, इसलिए ही उन्हें प्रत्येक वस्तु से कुछ न कुछ सीख मिली।
साँप सामान्यतया किसी को अकारण नहीं काटता। उसे परेशान करने वाले को या छेड़ने वालों को ही वह डंसता है। साँप भी प्रभु का सर्जन है, वह यदि नुकसान किए बिना सरलता से जाता हो, या निरुपद्रवी बनकर जीता हो तो उसे मारने का हमें कोई अधिकार नहीं है। जब हम उसके प्राण लेने का प्रयत्न करते हैं, तब अपने प्राण बचाने के लिए या अपना जीवन टिकाने के लिए यदि वह हमें डँस दे तो उसे दुष्ट कैसे कहा जा सकता है? हमारे प्राण लेने वालों के प्राण लेने का प्रयत्न क्या हम नहीं करते?
रामपाल जी
पूर्ण संत रामपाल जी 

पूर्ण परमात्मा कबीर देव जी का सतभक्ति ज्ञान देने के लिए धरती पर अवतरित होते हैं। या अपना अंंश भेजते हैं। वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज सतभक्ति का ज्ञान देकर हम जीवों का उद्धार कर रहे हैं। इस सतभक्ति ज्ञान को अपना कर जो भी जीव शरण मे आया है वह अवश्य ही लाभान्वित हुआ है।

Wednesday, July 8, 2020

सही शिक्षा क्या हैं ?

सही शिक्षा
शिक्षा की जड कडवी है, परन्तु उसका फल मिठा हैं -अरस्तू।
अरस्तू के विचार
अरस्तू

शिक्षा मानव को एक सभ्य नागरिक और समाज को विकसित करने का कार्य करती है।
शिकशिक्शशित समाज में को परिवार को नई दिशा प्रदान करता है। शिक्षा प्राप्त करने से ही सही और गलत का भेद सही से किया जा सकता है। शिक्षा से ही कई जाती,जनजाति आज उन्नति के शिखर पर है। और अपने तथा देश की प्रगति में भागीदार हैं।
सरकारी विधालय
एक सरकारी विधालय मे विधार्थी

शिक्षा का स्तर
देश में वर्तमान शिक्षा का स्तर चारों तरफ फैल चुका है।
गरीब से गरीब और उच्च धनाढ्य वर्ग अपनी संतानों को शिक्षा दिलाने में पिछे नहीं है। लेकिन देश की शिक्षा व्यवस्था कई होनहारों को आगे बढ़ने से रोक देती हैं। कई प्राथमिक शिक्षा तो कई माध्यमिक तक तथा कुछ प्रतिशत ही महाविद्यालय तक की शिक्षा ग्रहण पाते है। संचार साधनों की उपलब्धता से यह और भी जरूरी हो जाता है शिक्षा के प्रचार प्रसार से।
भारत में शिक्षा व्यवस्था
निजी विधालय
वर्तमान शिक्षा
आज वर्तमान में जो भी युवा हैं उसका एक ही उद्देश्य होता है कि शिक्षा ग्रहण करने के बाद किसी प्रकार कोई छोटि मोटी सरकारी नौकरी मिले तो मे भी बडा घर, बडी 4,5 कारे हो संतान को सही पालन पोषण मिले। लेकिन आज लाखो युवा महाविद्यालय की शिक्षा ग्रहण करके निकलते हैं लेकिन मुठ्ठी भर युवाओं को ही सही नोकरी या व्यापार प्राप्त होता है।
आज के अधिकतर युवा अपना जीवन सिर्फ एक अदद नोकरी से ही जीवन सफल मानते हैं। अब सोचने वाली बात यह है कि यह जो विकास आज हमें आज दिखाई देता है वह पहले क्यों नहीं हो सका ? 
सामाजिक विकास की रीढ ही शिक्षा को माना गया है। देश की सरकारों द्वारा समय समय पर शिक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं जिससे गरीब परिवार की संतानें भी शिक्षा प्राप्त कर रही है। लेकिन देश की शिक्षा व्वस्था आज एक बहुत बडा व्यापार का रूप ले चुकी है जिसे शिक्षा माफिया कहे तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।
नोकरी बनाम डिग्रियां
शिक्षा बनाम डिग्री

क्यों आवश्यक है शिक्षा ?

विचारणीय विषय यह है कि आज इस वर्तमान समय में ही क्यों शिक्षा की बाढ आई हैं। शिक्षा प्राप्त करने का मूल उद्देश्य यही है कि हम अपने धर्म ग्रंथों को देख,समझ सके...इनमें छिपे गुढ ज्ञान को जान पाए। संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताए गए पुराणों, वेदो, गीता जी,कुरान, बाईबल आदि से स्पष्ट किया गया है कि यह शिक्षा हम इन सदग्रन्थों को समझ सके। संत रामपाल जी महाराज द्वारा दि गई शिक्षा से आज समाज दहेज प्रथा का अंत करने,कन्या हत्या, झूठ बोलने, पाखंड पर रोक,नशे पर रोक आदि दिए गए ज्ञान से समाज सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Tuesday, June 23, 2020

काशी में कर्म कांड

हिंदुस्तान की भूमि बडी ही पुण्य भूमि हैं। जहाँ पर कई ऋषियों, महर्षियों ने जन्म लिया है और अपनी ज्ञान का प्रकाश फेलाकर भक्त और आम समाज को दिशा प्रदान की। यहाँ तक की विष्णु जी,शिव जी आदि भी अवतार रूप में जन्म लेकर अपने को धन्य बनाया है। काशी के लिए तो कहा जाता है कि यह नगरी स्वयं शंकर जी ने रचि है। इसलिए काशी की भूमि को बडी ही पावन माना गया है।
काशी नगर
काशी
काशी नगरी
बडे बडे ऋषियों, महर्षियों तथा स्वयं शकर जी की भूमि को सतयुग, त्रेतायुग तथा द्वापर युग में वदो तथा पुराणों में बताई भक्ति विधि को अपनाकर अपना कल्याण समझते थे। लेकिन जब से धर्म को व्यवसाय बना कर नकली पंडितों ने अपना घर भरना शुरू कर दिया, तब से काशी में आए दिन भक्त समाज को बरगलाकर मोक्ष के नाम पर लुटा जाने लगा। कभी वहाँ पर आश्रम बनाकर तो कभी अन्य रुप में भोले भक्त लुटते रहे। जब इस प्रकार की क्रियाए काशी में ज्यादा होने लगी तो काशी के नकली धर्म के ठेकेदारो ने अन्य रास्ते खोजने लगे।
उन्हीं मे से एक रास्ता था करोंत का। 
काशी में भक्त
काशी में भक्त
जिससे भक्त समाज को बताया जाने लगा कि स्वर्ग से एक विमान आता है जिसमे बैठकर भक्त सीधे स्वर्ग पहुंच जाता हैं। पंडितों की यह योजना सफल हो गई और कई भक्त अपने परिवार जनो को समझाने लगे कि मरना तो है हि अगर मरकर सीधे ही स्वर्ग जा रहे है तो इससें उत्म बात और क्या हो सकती है।
काशी में बुजुर्ग अपनी बारी का इंतजार करते हुए
काशी में एक भक्त
बुजुर्ग माता पिता की संतानें अपने मात पिता की आज्ञा को मानकर नकली पंडितों की बातें मानकर और उनके द्वारा निर्धारित किए धन को देकर यह कर्म कांड प्रारंभ कर दिया। इस करोंत के अन्तर्गत जिस भी व्यक्ति को स्वर्ग जाने की जल्दी होती तो उसे एक नाव मे बेठाकर ओर पंडितों द्वारा निर्धारित स्थान पर उस नाव को रोककर एक इशारा कर दिया जाता था और दूसरी तरफ उस करोंत का हत्था होता था जिसे उस तरफ बेठा व्यक्ति इशारा पाकर उस हत्थे को घुमा देता था और वह पंडित उस व्यक्ति को बता देते थे कि करोंत आ रही है आप अब कुछ ही क्षणों में स्वर्ग मे जाने वाले हो।
इस प्रकार यह नकली कर्मकांड फलने फूलने लगा। और हजारों की संख्या में भक्त इससे बेवजह मृत्यु को प्राप्त हुए।
इस करोंत को कबीर परमात्मा ने अपने ज्ञान से भक्तो को अवगत करवाया और इस कर्मकांड को बंद करवाया।
काशी के पंडित
काशी के पंडित 
वर्तमान साधना
वर्तमान समय मे भी समाज में भक्त समाज को स्वर्ग मे जाने और मोक्ष के नाम पर गलत साधना करवाई जा रही हैं। लेकिन आज संत रामपाल जी महाराज अपने ज्ञान की वजह से इस तरहा की साधना का नाश कर रहे हैं। और शास्त्र अनुसार साधना बताकर पूर्ण मोक्ष का मार्ग बता रहे हैं।

Wednesday, June 17, 2020

Janamatami:Birthday of Lord Krishna

भारत मे भगवानो के जन्मदिन बडी ही धूमधाम से मनाया जाता है। फिर चाहे शिव भगवान की शिवरात्रि हो,रामचंद्र जी की रामनवमी हो,नानक देव जी का प्रकाश पर्व हो,या फिर कृष्ण जी का जन्मोत्सव जिसे कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। भारत वर्ष के अलावा विश्व के अन्य राष्ट्रो मे भी मनाया जाता हैं।
जन्माष्टमी
कृष्णजन्माष्टमी
कृष्ण लीलाए
श्रीकृष्ण जी ने अपने मामा कंस द्वारा भेजे गए राक्षसों का वध किया और मथुरा वासियों की रक्षा की। 
मोरध्वज के पुत्र को जीवित करना
श्रीकृष्ण जी ने अर्जुन का घंमड दुर करने के लिए मोरध्वज के पुत्र ताम्रध्वज को परिक्षा लेने के लिए उसे आरे से शरीर को २ हिस्सों में कर दिया और उसे फिर से जिंदा कर दिया था। लेकिन लेकिन कबीर परमात्मा ने तो अपने शक्ति से छ: महिने  पूर्व कब्र मे दबा दि गई बच्ची को कब्र मे से जिंदा कर दिया था।
कृष्ण जन्माष्टमी
कृष्णलीलाए
सुदामा की सहायता
श्रीकृष्ण के परम मित्र सुदामा की सहायता किया जिससे उन्हें कुछ धन और एक महल बना दिया जिससे उनका निर्वहन सिर्फ उस जन्म तक ही हो सका,लेकिन परमेश्वर कबीर जी द्वारा अपने शिष्य तैमूर लंग की एक रोटी खाकर उसे सात पीढियों तक का राज प्रदान किया।

अश्वमेध यज्ञ को पूर्ण करना
पाडंवो द्वारा महाभारत के युद्ध के पश्चात एक अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया गया था जिसमें ब्राह्मंड के सभी देवी-देवता, ऋषि महर्षि, ब्रह्मा जी, विष्णु जी,शंकर जी आदि तथा स्वयं श्रीकृष्ण जी भी उपस्थित होने पर भी यज्ञ मैं रखा शंख नहीं बजा था,वह भी पूर्ण परमात्मा द्वारा अपने शिष्य का रूप बनाकर आए और भोजन ग्रहण करने पर ही संभव हो पाया था।
कृष्ण जन्माष्टमी
सतसाधना

उपरोक्त लेख से स्पष्ट है कि तीनों भगवानो की साधना हमारे पापों का नाश नहीं कर सकती हैं। यह सिर्फ हमारे कर्मो मे आए सुख दुख को कम या ज्यादा नहीं कर सकते हैं। जब तक हमारे पापों का नाश नहीं हो सकता है और पापों का नाश पूर्ण परमात्मा की सत साधना से ही संभव है।


Tuesday, June 9, 2020

परमात्मा का प्रमाण

विश्व समुदाय में बाईबल को मानने वाली जनसंख्या बहुत है। कई देशों की तो जनसंख्या शत प्रतिशत इसाई धर्म को मानती हैं। आधुनिक तकनीक का भी बेहतर अनुभव रखते हैं। बाईबल को परमेश्वर की रचना मानते हैं, लेकिन जब उनसे पूछा जाता है कि "परमात्मा साकार है या निराकार"? तो उनका जवाब ऐसा होता हैं जैसे कोई अशिक्षित व्यक्ति हो। वह बताते हैं परमात्मा तो निराकार हैं। विश्व में जितने भी समुदाय, धर्म हैं वह सभी परमात्मा को निराकार ही बताते है। जबकि विश्व की अधिसंख्या बेहतर शिक्षित हो चुकी हैं। बाईबल मे यह भी बताया गया है कि परमात्मा ने मास खाने का आदेश नहीं दिया है और अन्य धर्मों की भाति एक से अधिक प्रभु है ओर साकार है।

बाईबल मे प्रमाण
पवित्र बाईबल मे भी कई प्रभुऔ के होने का प्रमाण मिलता है। उत्पत्ति अध्याय 18:1-10,अध्याय 19:1-25 मे तीन प्रभुऔ का प्रमाण है।
परमात्मा साकार रुप मे हैं।
पवित्र बाईबल के उत्पत्ति ग्रंथ से सिद्ध होता है कि परमात्मा साकार रूप में है और मानव सदृश्य है।
मांस खाने का आदेश नहीं है।
पवित्र बाईबल के उत्पत्ति ग्रंथ के 1:29 मे परमेश्वर ने कहा है कि जितने भी बीज वाले छोटे छोटे पेड पृथ्वी के उपर हैंऔर जितने वृक्षों में बीज वाले फल होते हैं वह सब मैने तुम्हें दे दिए है,वे तुम्हारे भोजन के लिए है। अब विचार करीए यह मांस खाने का आदेश किसने दिया है ?
परमात्मा आयु भी बढा देता है।
जी,हा। पूर्ण परमात्मा अपने साधक की आयु को भी बढा देता है और उसका कल्याण भी करता है।
क्या यीशु परमेश्वर हैं ?
पवित्र सदग्रन्थों मे प्रमाण मिलता है कि परमात्मा कभी किसी मां के गर्भ से जन्म नहीं लेते हैं। लेकिन यीशु ने मरियम के गर्भ से जन्म लिया। इससे सिद्ध होता है कि यीशु पूर्ण परमेश्वर नहीं है। जगत का तारण हार कोई अन्य प्रभु हैं। तो फिर कोन है वह प्रभु जिनकी शरण ग्रहण करने से जीव का जन्म मरण के बंधनों से मुक्त हो जाए?
पवित्र बाईबल मे ही यह स्पष्ट प्रमाण है। जिनका नाम कबीर हैं। अयुब 36:5 मे लिखा है कि वह किसी से घृणा नहीं करते हैं।
अब यह प्रश्न अनिवार्य रूप में आपके मन मे आ रहा होगा कि " तो फिर अभी वर्तमान में क्या कोई संत या पूर्ण परमात्मा नहीं है जो सम्पूर्ण मानव जाति का कल्याण कर सके ?
सृष्टि के प्रारंभ से ही जम्बूद्वीप (भारत) को आध्यात्मिक ज्ञान मे विश्व का सिरमौर रहा है। जहाँ पर प्रत्येक युग में परमात्मा स्वयं आते हैं या अपना संदेश वाहक या दास को इस पावन धरा पर अपने सत भक्ति के प्रचार प्रसार के लिए भेजते हैं। वर्तमान में भी परमेश्वर कबीर जी ने संत रामपाल जी महाराज के रुप मे धरती पर अपना संदेश वाहक बनाकर भेजा है। जिन्होंने ही बताया है कि परमात्मा साकार हैं। पवित्र बाईबल की हकीकत दुनिया के सामने बताई और सही भक्ति तथा ज्ञान से जीवों का उद्दार कर रहे हैं। 





Tuesday, May 19, 2020

मानव उत्थान

परमात्मा द्वारा रचित इस सृष्टि मे मनुष्य का स्थान सर्वोपरि है। प्रत्येक मनुष्य इस लोक में सर्वश्रेष्ठ बनना चाहता है। इसके लिए वह हमेशा प्रयास करता रहता है। मानवीय संवेदना को आज भुला दिया गया है। प्रत्येक मनुष्य आज एक दुसरे से आगे निकलना चाहता है। यही एक मूल कारण है कि मानव उत्थान सही दिशा में नहीं हो पा रहा है।
  " मानुष जन्म पाए कर जो नहीं रटे हरि नाम।
  जैसे कुआं जल बिना बनवाया फिर क्या काम"।।
कबीर जी द्वारा बताई गई इस वाणी मे मनुष्य जन्म का मूल छिपा है। मानव उत्थान करने के लिए हमें हमारे शास्त्रों का ज्ञान होना जरूरी है। क्योंकि इन शास्त्रौ के द्वारा ही सम्पूर्ण विश्व की मानव जाति का उत्थान बेहतर ढंग से किया जा सकता है। सतभक्ति से ही हमारे दुखों का नाश होता है। 
विश्व में कई ऐसी संस्थाए हैं मानव उत्थान जैसा कार्य कर रही हैं। लेकिन उनका उद्देश्य मानव कल्याण कम और धन उपार्जन अधिक होता हैं। लेकिन इस भोतिक युग में जहां प्रत्येक प्राणी प्रत्येक मनुष्य की मदद यह सोचकर करता है कि भविष्य में मुझे इससे कोई लाभ हो सकता है। वही भारत में एक संत ऐसे हैं उनका उद्देश्य ही मानव उत्थान और कल्याण हैं। ऐसे संत रामपाल जी महाराज है जिनका ध्येय वाक्य है
 " जीव हमारी जाती हैं, मानव धर्म हमारा।
 हिन्दू, मुस्लिम, सिख,इसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा"। संत जी द्वारा मानव उत्थान हेतु कई कार्य किया जा रहा है। जैसे नशा मुक्ति, दहेज प्रथा का उनमूलन, मांसाहार का नाश, और शास्त्र सम्वत भक्ति प्रदान करना। ऐसे कार्य करने और मानव जीवन में अपनाने से मानव उत्थान अवश्य ही सभंव हो रहा हैं।



भाई दुज

हमारे देश में प्रत्येक महीने में कोई ना कोई त्योहार मनाया जाता है। और प्रत्येक त्योहार आपसी रिश्ते से गहरे जुडे होते है। प्रत्येक पर्व बडे ह...