Tuesday, June 23, 2020

काशी में कर्म कांड

हिंदुस्तान की भूमि बडी ही पुण्य भूमि हैं। जहाँ पर कई ऋषियों, महर्षियों ने जन्म लिया है और अपनी ज्ञान का प्रकाश फेलाकर भक्त और आम समाज को दिशा प्रदान की। यहाँ तक की विष्णु जी,शिव जी आदि भी अवतार रूप में जन्म लेकर अपने को धन्य बनाया है। काशी के लिए तो कहा जाता है कि यह नगरी स्वयं शंकर जी ने रचि है। इसलिए काशी की भूमि को बडी ही पावन माना गया है।
काशी नगर
काशी
काशी नगरी
बडे बडे ऋषियों, महर्षियों तथा स्वयं शकर जी की भूमि को सतयुग, त्रेतायुग तथा द्वापर युग में वदो तथा पुराणों में बताई भक्ति विधि को अपनाकर अपना कल्याण समझते थे। लेकिन जब से धर्म को व्यवसाय बना कर नकली पंडितों ने अपना घर भरना शुरू कर दिया, तब से काशी में आए दिन भक्त समाज को बरगलाकर मोक्ष के नाम पर लुटा जाने लगा। कभी वहाँ पर आश्रम बनाकर तो कभी अन्य रुप में भोले भक्त लुटते रहे। जब इस प्रकार की क्रियाए काशी में ज्यादा होने लगी तो काशी के नकली धर्म के ठेकेदारो ने अन्य रास्ते खोजने लगे।
उन्हीं मे से एक रास्ता था करोंत का। 
काशी में भक्त
काशी में भक्त
जिससे भक्त समाज को बताया जाने लगा कि स्वर्ग से एक विमान आता है जिसमे बैठकर भक्त सीधे स्वर्ग पहुंच जाता हैं। पंडितों की यह योजना सफल हो गई और कई भक्त अपने परिवार जनो को समझाने लगे कि मरना तो है हि अगर मरकर सीधे ही स्वर्ग जा रहे है तो इससें उत्म बात और क्या हो सकती है।
काशी में बुजुर्ग अपनी बारी का इंतजार करते हुए
काशी में एक भक्त
बुजुर्ग माता पिता की संतानें अपने मात पिता की आज्ञा को मानकर नकली पंडितों की बातें मानकर और उनके द्वारा निर्धारित किए धन को देकर यह कर्म कांड प्रारंभ कर दिया। इस करोंत के अन्तर्गत जिस भी व्यक्ति को स्वर्ग जाने की जल्दी होती तो उसे एक नाव मे बेठाकर ओर पंडितों द्वारा निर्धारित स्थान पर उस नाव को रोककर एक इशारा कर दिया जाता था और दूसरी तरफ उस करोंत का हत्था होता था जिसे उस तरफ बेठा व्यक्ति इशारा पाकर उस हत्थे को घुमा देता था और वह पंडित उस व्यक्ति को बता देते थे कि करोंत आ रही है आप अब कुछ ही क्षणों में स्वर्ग मे जाने वाले हो।
इस प्रकार यह नकली कर्मकांड फलने फूलने लगा। और हजारों की संख्या में भक्त इससे बेवजह मृत्यु को प्राप्त हुए।
इस करोंत को कबीर परमात्मा ने अपने ज्ञान से भक्तो को अवगत करवाया और इस कर्मकांड को बंद करवाया।
काशी के पंडित
काशी के पंडित 
वर्तमान साधना
वर्तमान समय मे भी समाज में भक्त समाज को स्वर्ग मे जाने और मोक्ष के नाम पर गलत साधना करवाई जा रही हैं। लेकिन आज संत रामपाल जी महाराज अपने ज्ञान की वजह से इस तरहा की साधना का नाश कर रहे हैं। और शास्त्र अनुसार साधना बताकर पूर्ण मोक्ष का मार्ग बता रहे हैं।

Wednesday, June 17, 2020

Janamatami:Birthday of Lord Krishna

भारत मे भगवानो के जन्मदिन बडी ही धूमधाम से मनाया जाता है। फिर चाहे शिव भगवान की शिवरात्रि हो,रामचंद्र जी की रामनवमी हो,नानक देव जी का प्रकाश पर्व हो,या फिर कृष्ण जी का जन्मोत्सव जिसे कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। भारत वर्ष के अलावा विश्व के अन्य राष्ट्रो मे भी मनाया जाता हैं।
जन्माष्टमी
कृष्णजन्माष्टमी
कृष्ण लीलाए
श्रीकृष्ण जी ने अपने मामा कंस द्वारा भेजे गए राक्षसों का वध किया और मथुरा वासियों की रक्षा की। 
मोरध्वज के पुत्र को जीवित करना
श्रीकृष्ण जी ने अर्जुन का घंमड दुर करने के लिए मोरध्वज के पुत्र ताम्रध्वज को परिक्षा लेने के लिए उसे आरे से शरीर को २ हिस्सों में कर दिया और उसे फिर से जिंदा कर दिया था। लेकिन लेकिन कबीर परमात्मा ने तो अपने शक्ति से छ: महिने  पूर्व कब्र मे दबा दि गई बच्ची को कब्र मे से जिंदा कर दिया था।
कृष्ण जन्माष्टमी
कृष्णलीलाए
सुदामा की सहायता
श्रीकृष्ण के परम मित्र सुदामा की सहायता किया जिससे उन्हें कुछ धन और एक महल बना दिया जिससे उनका निर्वहन सिर्फ उस जन्म तक ही हो सका,लेकिन परमेश्वर कबीर जी द्वारा अपने शिष्य तैमूर लंग की एक रोटी खाकर उसे सात पीढियों तक का राज प्रदान किया।

अश्वमेध यज्ञ को पूर्ण करना
पाडंवो द्वारा महाभारत के युद्ध के पश्चात एक अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया गया था जिसमें ब्राह्मंड के सभी देवी-देवता, ऋषि महर्षि, ब्रह्मा जी, विष्णु जी,शंकर जी आदि तथा स्वयं श्रीकृष्ण जी भी उपस्थित होने पर भी यज्ञ मैं रखा शंख नहीं बजा था,वह भी पूर्ण परमात्मा द्वारा अपने शिष्य का रूप बनाकर आए और भोजन ग्रहण करने पर ही संभव हो पाया था।
कृष्ण जन्माष्टमी
सतसाधना

उपरोक्त लेख से स्पष्ट है कि तीनों भगवानो की साधना हमारे पापों का नाश नहीं कर सकती हैं। यह सिर्फ हमारे कर्मो मे आए सुख दुख को कम या ज्यादा नहीं कर सकते हैं। जब तक हमारे पापों का नाश नहीं हो सकता है और पापों का नाश पूर्ण परमात्मा की सत साधना से ही संभव है।


Tuesday, June 9, 2020

परमात्मा का प्रमाण

विश्व समुदाय में बाईबल को मानने वाली जनसंख्या बहुत है। कई देशों की तो जनसंख्या शत प्रतिशत इसाई धर्म को मानती हैं। आधुनिक तकनीक का भी बेहतर अनुभव रखते हैं। बाईबल को परमेश्वर की रचना मानते हैं, लेकिन जब उनसे पूछा जाता है कि "परमात्मा साकार है या निराकार"? तो उनका जवाब ऐसा होता हैं जैसे कोई अशिक्षित व्यक्ति हो। वह बताते हैं परमात्मा तो निराकार हैं। विश्व में जितने भी समुदाय, धर्म हैं वह सभी परमात्मा को निराकार ही बताते है। जबकि विश्व की अधिसंख्या बेहतर शिक्षित हो चुकी हैं। बाईबल मे यह भी बताया गया है कि परमात्मा ने मास खाने का आदेश नहीं दिया है और अन्य धर्मों की भाति एक से अधिक प्रभु है ओर साकार है।

बाईबल मे प्रमाण
पवित्र बाईबल मे भी कई प्रभुऔ के होने का प्रमाण मिलता है। उत्पत्ति अध्याय 18:1-10,अध्याय 19:1-25 मे तीन प्रभुऔ का प्रमाण है।
परमात्मा साकार रुप मे हैं।
पवित्र बाईबल के उत्पत्ति ग्रंथ से सिद्ध होता है कि परमात्मा साकार रूप में है और मानव सदृश्य है।
मांस खाने का आदेश नहीं है।
पवित्र बाईबल के उत्पत्ति ग्रंथ के 1:29 मे परमेश्वर ने कहा है कि जितने भी बीज वाले छोटे छोटे पेड पृथ्वी के उपर हैंऔर जितने वृक्षों में बीज वाले फल होते हैं वह सब मैने तुम्हें दे दिए है,वे तुम्हारे भोजन के लिए है। अब विचार करीए यह मांस खाने का आदेश किसने दिया है ?
परमात्मा आयु भी बढा देता है।
जी,हा। पूर्ण परमात्मा अपने साधक की आयु को भी बढा देता है और उसका कल्याण भी करता है।
क्या यीशु परमेश्वर हैं ?
पवित्र सदग्रन्थों मे प्रमाण मिलता है कि परमात्मा कभी किसी मां के गर्भ से जन्म नहीं लेते हैं। लेकिन यीशु ने मरियम के गर्भ से जन्म लिया। इससे सिद्ध होता है कि यीशु पूर्ण परमेश्वर नहीं है। जगत का तारण हार कोई अन्य प्रभु हैं। तो फिर कोन है वह प्रभु जिनकी शरण ग्रहण करने से जीव का जन्म मरण के बंधनों से मुक्त हो जाए?
पवित्र बाईबल मे ही यह स्पष्ट प्रमाण है। जिनका नाम कबीर हैं। अयुब 36:5 मे लिखा है कि वह किसी से घृणा नहीं करते हैं।
अब यह प्रश्न अनिवार्य रूप में आपके मन मे आ रहा होगा कि " तो फिर अभी वर्तमान में क्या कोई संत या पूर्ण परमात्मा नहीं है जो सम्पूर्ण मानव जाति का कल्याण कर सके ?
सृष्टि के प्रारंभ से ही जम्बूद्वीप (भारत) को आध्यात्मिक ज्ञान मे विश्व का सिरमौर रहा है। जहाँ पर प्रत्येक युग में परमात्मा स्वयं आते हैं या अपना संदेश वाहक या दास को इस पावन धरा पर अपने सत भक्ति के प्रचार प्रसार के लिए भेजते हैं। वर्तमान में भी परमेश्वर कबीर जी ने संत रामपाल जी महाराज के रुप मे धरती पर अपना संदेश वाहक बनाकर भेजा है। जिन्होंने ही बताया है कि परमात्मा साकार हैं। पवित्र बाईबल की हकीकत दुनिया के सामने बताई और सही भक्ति तथा ज्ञान से जीवों का उद्दार कर रहे हैं। 





भाई दुज

हमारे देश में प्रत्येक महीने में कोई ना कोई त्योहार मनाया जाता है। और प्रत्येक त्योहार आपसी रिश्ते से गहरे जुडे होते है। प्रत्येक पर्व बडे ह...