भारत मे भगवानो के जन्मदिन बडी ही धूमधाम से मनाया जाता है। फिर चाहे शिव भगवान की शिवरात्रि हो,रामचंद्र जी की रामनवमी हो,नानक देव जी का प्रकाश पर्व हो,या फिर कृष्ण जी का जन्मोत्सव जिसे कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। भारत वर्ष के अलावा विश्व के अन्य राष्ट्रो मे भी मनाया जाता हैं।
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| कृष्णजन्माष्टमी |
कृष्ण लीलाए
श्रीकृष्ण जी ने अपने मामा कंस द्वारा भेजे गए राक्षसों का वध किया और मथुरा वासियों की रक्षा की।
मोरध्वज के पुत्र को जीवित करना
श्रीकृष्ण जी ने अर्जुन का घंमड दुर करने के लिए मोरध्वज के पुत्र ताम्रध्वज को परिक्षा लेने के लिए उसे आरे से शरीर को २ हिस्सों में कर दिया और उसे फिर से जिंदा कर दिया था। लेकिन लेकिन कबीर परमात्मा ने तो अपने शक्ति से छ: महिने पूर्व कब्र मे दबा दि गई बच्ची को कब्र मे से जिंदा कर दिया था।
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| कृष्णलीलाए |
सुदामा की सहायता
श्रीकृष्ण के परम मित्र सुदामा की सहायता किया जिससे उन्हें कुछ धन और एक महल बना दिया जिससे उनका निर्वहन सिर्फ उस जन्म तक ही हो सका,लेकिन परमेश्वर कबीर जी द्वारा अपने शिष्य तैमूर लंग की एक रोटी खाकर उसे सात पीढियों तक का राज प्रदान किया।
अश्वमेध यज्ञ को पूर्ण करना
पाडंवो द्वारा महाभारत के युद्ध के पश्चात एक अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया गया था जिसमें ब्राह्मंड के सभी देवी-देवता, ऋषि महर्षि, ब्रह्मा जी, विष्णु जी,शंकर जी आदि तथा स्वयं श्रीकृष्ण जी भी उपस्थित होने पर भी यज्ञ मैं रखा शंख नहीं बजा था,वह भी पूर्ण परमात्मा द्वारा अपने शिष्य का रूप बनाकर आए और भोजन ग्रहण करने पर ही संभव हो पाया था।
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| सतसाधना |
उपरोक्त लेख से स्पष्ट है कि तीनों भगवानो की साधना हमारे पापों का नाश नहीं कर सकती हैं। यह सिर्फ हमारे कर्मो मे आए सुख दुख को कम या ज्यादा नहीं कर सकते हैं। जब तक हमारे पापों का नाश नहीं हो सकता है और पापों का नाश पूर्ण परमात्मा की सत साधना से ही संभव है।



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