" मानुष जन्म पाए कर जो नहीं रटे हरि नाम।
जैसे कुआं जल बिना बनवाया फिर क्या काम"।।
कबीर जी द्वारा बताई गई इस वाणी मे मनुष्य जन्म का मूल छिपा है। मानव उत्थान करने के लिए हमें हमारे शास्त्रों का ज्ञान होना जरूरी है। क्योंकि इन शास्त्रौ के द्वारा ही सम्पूर्ण विश्व की मानव जाति का उत्थान बेहतर ढंग से किया जा सकता है। सतभक्ति से ही हमारे दुखों का नाश होता है।
विश्व में कई ऐसी संस्थाए हैं मानव उत्थान जैसा कार्य कर रही हैं। लेकिन उनका उद्देश्य मानव कल्याण कम और धन उपार्जन अधिक होता हैं। लेकिन इस भोतिक युग में जहां प्रत्येक प्राणी प्रत्येक मनुष्य की मदद यह सोचकर करता है कि भविष्य में मुझे इससे कोई लाभ हो सकता है। वही भारत में एक संत ऐसे हैं उनका उद्देश्य ही मानव उत्थान और कल्याण हैं। ऐसे संत रामपाल जी महाराज है जिनका ध्येय वाक्य है
" जीव हमारी जाती हैं, मानव धर्म हमारा।
हिन्दू, मुस्लिम, सिख,इसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा"। संत जी द्वारा मानव उत्थान हेतु कई कार्य किया जा रहा है। जैसे नशा मुक्ति, दहेज प्रथा का उनमूलन, मांसाहार का नाश, और शास्त्र सम्वत भक्ति प्रदान करना। ऐसे कार्य करने और मानव जीवन में अपनाने से मानव उत्थान अवश्य ही सभंव हो रहा हैं।
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