Tuesday, May 19, 2020

मानव उत्थान

परमात्मा द्वारा रचित इस सृष्टि मे मनुष्य का स्थान सर्वोपरि है। प्रत्येक मनुष्य इस लोक में सर्वश्रेष्ठ बनना चाहता है। इसके लिए वह हमेशा प्रयास करता रहता है। मानवीय संवेदना को आज भुला दिया गया है। प्रत्येक मनुष्य आज एक दुसरे से आगे निकलना चाहता है। यही एक मूल कारण है कि मानव उत्थान सही दिशा में नहीं हो पा रहा है।
  " मानुष जन्म पाए कर जो नहीं रटे हरि नाम।
  जैसे कुआं जल बिना बनवाया फिर क्या काम"।।
कबीर जी द्वारा बताई गई इस वाणी मे मनुष्य जन्म का मूल छिपा है। मानव उत्थान करने के लिए हमें हमारे शास्त्रों का ज्ञान होना जरूरी है। क्योंकि इन शास्त्रौ के द्वारा ही सम्पूर्ण विश्व की मानव जाति का उत्थान बेहतर ढंग से किया जा सकता है। सतभक्ति से ही हमारे दुखों का नाश होता है। 
विश्व में कई ऐसी संस्थाए हैं मानव उत्थान जैसा कार्य कर रही हैं। लेकिन उनका उद्देश्य मानव कल्याण कम और धन उपार्जन अधिक होता हैं। लेकिन इस भोतिक युग में जहां प्रत्येक प्राणी प्रत्येक मनुष्य की मदद यह सोचकर करता है कि भविष्य में मुझे इससे कोई लाभ हो सकता है। वही भारत में एक संत ऐसे हैं उनका उद्देश्य ही मानव उत्थान और कल्याण हैं। ऐसे संत रामपाल जी महाराज है जिनका ध्येय वाक्य है
 " जीव हमारी जाती हैं, मानव धर्म हमारा।
 हिन्दू, मुस्लिम, सिख,इसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा"। संत जी द्वारा मानव उत्थान हेतु कई कार्य किया जा रहा है। जैसे नशा मुक्ति, दहेज प्रथा का उनमूलन, मांसाहार का नाश, और शास्त्र सम्वत भक्ति प्रदान करना। ऐसे कार्य करने और मानव जीवन में अपनाने से मानव उत्थान अवश्य ही सभंव हो रहा हैं।



Wednesday, May 13, 2020

खराब शिक्षा व्यवस्था

वर्तमान समय में जिस तरह की शिक्षा व्यवस्था हमारे देश में चल रही है, वह कुछ हद तक संतोषजनक नहीं हैं। भारत की शिक्षा व्यवस्था में काफी बदलाव दिखे हैं परंतु कमियां भी उससे ज़्यादा दिखाई देती हैं।
किसी भी देश के विकास में शिक्षा का बहुत महत्व योगदान रहा है। हमारे देश के विकास में भी शिक्षा का महत्वपूर्ण  योगदान रहता है क्योंकि शिक्षा के बिना कुछ भी संभव नहीं है।
शिक्षा ही वह हथियार है जिससे देश का विकास सम्भव है और वर्तमान में जिस तरह की शिक्षा हमारे देश मे चल रही है उसमें सरकार को कुछ बदलाव लाने की ज़रूरत है। मौजूदा दौर में विशेष रूप से प्रारम्भिक शिक्षा पर ध्यान देने की ज़रूरत है ताकि बच्चों की नींव मज़बूत हो सके।
बच्चों की नींव मज़बूत रहने पर वे आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, आईपीएस, वैज्ञानिक तथा विभिन्न क्षेत्रों में उम्दा प्रदर्शन कर सकते हैं। भारत एक युवा देश है जहां की कुल आबादी में 65 प्रतिशत से ज़्यादा युवा हैं। 
प्रारंभिक शिक्षा के महत्व को देखते हुए अगर वर्तमान में चल रही व्यवस्था पर नज़र डाली जाए तब गाँवों के बच्चों को बहुत सारी सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। वर्तमान समय में गरीब बच्चों के लिए सरकार स्कूल तो मुहैया करा देती है लेकिन कई दफा पढ़ने के लिए उन्हें ज़रूरी सामग्रियां नहीं मिल पाती हैं। शहरों में भी सरकारी विधालयों की हालत कुछ ज्यादा सही नहीं कही जाा सकती हैं। और निजी विधालय मैं पढ़ाना हर किसी के बस की बात नहीं है आज वर्तमान में चाहे वह सरकारी विद्यालय हो निजी हो या सरकारी या निजी कोलेज सभी का एक ही उद्देश्य है शिक्षा के द्वारा व्यापार करना । जब शिक्षा को व्यापार बना देगें तो देश की  शिक्षा व्यवस्था  सही नहीं हो सकती।
देश के कई विद्यालय शिक्षकों की कमी से भी जूझ रहे हैं और कहीं पर विद्यार्थी नहीं आ पा रहे हैं यह भी एक बडा कारण हैं। कला शिक्षा व्यवस्था को सुधारने तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने कई प्रयास किए हैं तथा करोड़ों रुपए भी खर्च किए हैं जिनसे हालत ज्यादा सुधर नहीं पाए। शिक्षा का उद्देश्य युवा को समाज में रहने अथवा जीवन-यापन की कला में दीक्षित करना है। एकांत में रहकर ना तो व्यक्ति जीवन-यापन कर सकता है और ना ही पूर्णत: विकसित हो सकता है। इसके लिए प्रारंभिक शिक्षा से ही अंग्रेजों की शिक्षा पद्धति को हटाकर हमारे वेद पुराण गीता जी आदि का अध्ययन करवाया जाना चाहिए जिससे युवा अवस्था आने पर वह प्रत्येक गलत कार्य करने से पहले 10 बार सोचे ।अध्यात्मिक ज्ञान होने से वह गलत कार्य करने से डरेगा और आध्यात्म की ओर झुकाव होगा जिसे वह पूर्ण संत की खोज करेगा ।जिस प्रकार आज वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज के अनुयाई किसी भी प्रकार की बुराई नहीं करते हैं तथा औरों को भी गलत कार्य करने से रोकते हैं तथा सत भक्ति की शिक्षा बताकर उन्हें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा करते हैं। क्योंकि हमारे सद ग्रंथों में ऐसे गूढ़ ज्ञान है जिन्हें पढ़कर व्यक्ति गलत राह का त्याग कर देता है और भगवान से डरने लग जाता है। तो इस प्रकार जब देश के प्रत्येक बालक को प्रारंभ से ही हमारे सदग्रंथों का ज्ञान होगा तो अच्छी शिक्षा के साथ-साथ वह एक सभ्य और ईमानदार नागरिक बनेगा।
सदग्रन्थों को विस्तार से जानने के लिए यह आईए

Tuesday, May 12, 2020

सच्चा भगवान कोन हैं ?

आज वर्तमान में पूरे विश्व की आबादी भगवान,गॉड,अल्लाह को मानती है। इसमें कुछ प्रतिशत अपवाद भी है जो भगवान को नहीं मानते हैं। प्रत्येक व्यक्ति अपने जन्म से ही ईश्वर की ओर झुकाव हो जाता है। इसाईयो के जीसस, मुसलमानों के पैगंबर साहब, हिंदुओं के श्री रामचंद्र जी, श्री कृष्ण जी, श्री शंकर जी, श्री विष्णु जी, बौद्ध धर्म के महात्मा बुद्ध को मानते हैं। लेकिन हम मानव जाति इनसे ऊपर कभी सोच नहीं सकते हैं।मनुष्य को कोई लाभ हो या हानि या फिर कोई प्राकृतिक आपदा हो या महामारी हो वह भगवान को ही जिम्मेदार ठहराता है। आखिर भगवान अपने बच्चों पर क्यों यह कहर ढहाता है,परेशान करता है। दुनिया आज इतनी आधुनिक हो गई है की वह भगवान के अस्तित्व को ही नकार देती है।
अब बात करते हैं 
भगवान के द्वारा जो लाभ प्राप्त होते हैं उन पर। वर्तमान में जितने भी धर्म संप्रदाय आदि है वह सभी अपने-अपने भगवानों को सर्वश्रेष्ठ और उनकी भक्ति को मोक्ष दायक बताते हैं। लेकिन आज वर्तमान में नकली धर्मगुरुओं द्वारा भगवान और भगत की आस्था को भी व्यापार का रूप दे दिया गया है ।आज का व्यक्ति अपने आर्थिक और भौतिक सुखों के लाभ प्राप्त करने के लिए सैकड़ों लाखों मिल की पदयात्रा कर लेता है फिर चाहे उसे कितने ही कष्ट क्यों ना उठाने पड़े ।जैसे अमरनाथ यात्रा हो, कैलाश मानसरोवर की यात्रा हो हज हो इनको सर्वश्रेष्ठ मानता है और सोचता है कि मुझे यहां पर जाने से अधिक है लाभ प्राप्त होगा।
वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए अब समय आ गया है कि हम उस असली परमेश्वर की खोज करें जिसकी शरण में जाने से परम शांति प्राप्त हो सर्वजन सुखी हो और इन सभी व्यर्थ की साधना का त्याग करें। विश्व के अनेक धर्मगुरु प्रयासरत है किंतु उनकी साधना से भी इस विश्व में शांति स्थापित नहीं हो सकती है।
विश्व के सभी धर्मगुरुओं ने अपने-अपने मत चलाएं हैं लेकिन यह नहीं बताया है कि विश्व में सभी प्रेमभाव से तथा शांति से किस प्रकार रह सकते हैं आखिर कौन है वह परमात्मा जिसके लिए विश्व के सभी धर्मों के धर्म ग्रंथ बता रहे हैं विश्व का सनातन धर्म हिंदू में भी अनेक धर्मगुरु हुए हैं लेकिन किसी ने भी सच्चा भगवान के बारे में नहीं बताया किंतु विश्व के जगत गुरु संत रामपाल जी महाराज ने ही सभी धर्म ग्रंथों के धर्म ग्रंथों के गूढ़ रहस्य पर से पर्दा हटा कर बताया है कि सच्चा भगवान प्रत्येक व्यक्ति की मनोकामना पूरी करते हैं पूर्ण गुरु से नाम दीक्षा लेकर मर्यादा में रहकर भक्ति करने से हमारी आयु भी बढ़ा देते हैं । संत रामपाल जी महाराज ने ही बताया है इस संपूर्ण ब्रह्मांड की ओर इस सृष्टि का निर्माण कबीर परमेश्वर जी ने ही किया है संत रामपाल जी महाराज के प्रयासों से ही आज विश्व की जनसंख्या जागृत हो रही है और अपने धर्म ग्रंथों को फिर से पढ़ रही है तथा उस अविनाशी कबीर परमेश्वर जी के बारे में जान रही है और सच्चे भगवान की तलाश पूरी हो रही है।
विश्व के प्राचीन सभी धर्म ग्रंथों में भी प्रमाण है--
यजुर्वेद अध्याय 5 के श्लोक नंबर 32 
अध्याय 29 के श्लोक नंबर 25 
सामवेद संख्या नंबर 359 अध्याय 4 के खंड 25 श्लोक 8
संख्या 1400 से अध्याय 12 खंड नंबर 3 श्लोक नंबर 7
अथर्ववेद कांड नंबर 4 के अनुक्रमांक एक के श्लोक नंबर 7 मॉडल नंबर 1 अध्याय 1 के सूक्त 11 के श्लोक 4 
ऋग्वेद मंडल नंबर 9 सूक्त 96 मंत्र 17,18 और 19 
श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 15 के श्लोक 1,2,4,6 और 15 
अध्याय नंबर 18 के श्लोक नंबर 46 और 62 में अध्याय 8 के श्लोक नंबर 8 से 10 तथा 22 में 
गुरु ग्रंथ साहिब पृष्ठ संख्या 24 तथा 721 में
कुरान शरीफ सूरत फुरकान नंबर 25 के आयत 19, 21,52, 58,59 में ।
नोट..... कुरान और बाइबल दोनों एक ही संदेश देते हैं कि उस कबीर अल्लाह की महिमा बयान करो ।बाइबल के अंदर उत्पत्ति ग्रंथ में सृष्टि क्रम में 7 दिन की रचना में अध्याय 21:20- 2:50 बाइबल उत्पत्ति ग्रंथ पृष्ठ नंबर 2 पर उल्लेख है।
उपरोक्त से स्पष्ट है कि "कबीर" परमेश्वर जी ही वास्तविक वह रचन हार परमात्मा है जिनकी महिमा सभी वेद, गीता जी, बाइबल, कुरान आदि धर्म ग्रंथ बता रहे हैं कि वह चारों युगों में आते हैं और अपना वास्तविक भक्ति विधि बताते हैं जिससे जीव का कल्याण मोक्ष संभव होता है।


Thursday, May 7, 2020

मनुष्य जन्म

मनुष्य जन्म प्राप्त होना अपने आप मे बहुत ही पुण्य कर्मी होना है। क्योंकि मनुष्य जन्म प्राप्त करने के लिए भगवान, इंद्र तथा देवता भी लालायित रहते हैं, किंतु मनुष्य जन्म हमें मिलता किस प्रकार है ???? 
चलिए जानते हैं 8400000 योनियों के भोगने के पश्चात ही मानव शरीर प्राप्त होता है ।ऐसे प्राप्त नहीं होता है ।अब जहां यह बताना अवश्य की है कि मानव शरीर दो प्रकार से प्राप्त होता है 8400000 प्राणियों के शरीरों में कष्ट भोगने के पश्चात मानव शरीर प्राप्त होता है , यह हैं क्रमानुसार ।
शुभ कर्म अनुसार मानव शरीर प्राप्त होना किसी किसी प्राणी के शुभ कार्य अधिक होने से उसे तुरंत मानव शरीर प्राप्त होता है ऐसा व्यक्ति परमात्मा की खोज में लगा रहता है ।जैसा भी उसको ज्ञान प्राप्त होता है वैसा ही वह भक्ति साधना करने लगता है ।यहां पर गीता जी का एक अध्याय है उसका विवरण देना अनिवार्य है-- गीता जी के अध्याय 16 श्लोक 23, 24 में कहा है कि शास्त्र विधि को त्याग कर जो साधक मनमाना आचरण करते हैं उनको न तो कोई सुख प्राप्त होता है ना कोई सिद्धि प्राप्त होती है और ना ही कोई लाभ मिलता है। यदि उस मानव शरीर प्राप्त प्राणी को शास्त्र अनुकूल भक्ति साधना नहीं मिलती है तो वह मानव अपना जीवन नष्ट कर जाता है फिर 8400000 योनियों में उसे कष्ट उठाने ही पढ़ते हैं । यदि पूर्ण संत द्वारा उसे सत भक्ति मिल जाए तो वह प्राणी शीघ्र भक्ति साधना स्वीकार करके अपना और अपने परिवार का जीवन सफल कर लेता है।
अब आते हैं क्रमानुसार मानव शरीर प्राप्त प्राणी पर । इस प्रकार प्राप्त मानव जीवन वाले मनुष्य परमात्मा की भक्ति साधना को नहीं शीघ्र अपनाते हैं ।यदि वह मनुष्य किसी के कहने सुनने से या बार-बार आग्रह करने पर भी सत भक्ति करता है तो उसका मन इस भक्ति में नहीं लगता है। और वह शीघ्र ही फिर से अआन उपासना करने लग जाता है। यहां पर कबीर जी का एक दोहा ऐसे व्यक्तियों के लिए एकदम सटीक है 
कबीर,पिछले पाप से हरि चर्चा न सुहावे के उंघे के उठ चले या और ए बात चलावे। 
ऐसे व्यक्तियों की आत्मा पर पाप कर्मों का ज्वर चढा है उसका उपचार है कि न चाहते हुए भी सत भक्ति करनी चाहिए जिससे धीरे-धीरे पाप कम हो जाएंगे फिर वही व्यक्ति 200 किलोमीटर सफर करके भी पूर्ण परमात्मा के सत्संग सुनना जाता है ।क्योंकि उसकी आत्मा स्वस्थ हो चुकी है उसको परमात्मा की महिमा सुनने की भूख लगी है।

Wednesday, May 6, 2020

समाज सुधार

       र्तमान समय में समाज में इतनी ज्यादा कुरितियां प्रचलित है कि मनुष्य इनसे मुक्ति नहीं पा सकता है। कथम कदम पर इतनी प्रथाएं हैं कि मानव जीवन का मूल उद्देश्य ही इनके आस पास रह गया है। इनमें से ही एक कुरिती है शादी।
जी, हा शादी। जिसके लिए लडके और लडकी वाले अपने हेसियत से भी बाहर जाकर करते हैं। इस तरहा की महंगी शादीयो के लिए उच्च धनाढ्य वर्ग और फिल्मो का बहुत ज्यादा रोल हैं। जिनको देख सुनकर एक आम गरीब मध्यम वर्गीय परिवार भी ऐसा ही करने की चेष्टा करता है, फिर भले ही उस पर लाखों, करोड़ों रुपए का कर्ज हो जाए।
लेकिन, क्या आप जानते हो कि इस पृथ्वी पर एक दिव्य महापुरुष ऐसे भी है जिनकी संगत,अनुयायी बिना किसी दिखावे के, बिना फिजुलखर्ची के बडे ही सामान्य रूप से मात्र सत्रह (१७) मिनट में शादी हो जाती हैं। वह भी बिना कोई दहेज दिए। जिसकी वजह से एक सभ्य, सुशील, विकार रहीत समाज का निर्माण हो रहा है। जिस कार्य को करने मे सरकारों को करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी सफलता प्राप्त नहीं हो पाई,उस कार्य को इन संत जी के वचनों ने कर दिया।
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर कोन हैं वह महापुरुष जिन्होंने वह शुभ कार्य कर दिया है जिसको करने में आज तक कोई सरकार सफल नहीं हो पाई। वह दिव्य महापुरुष हैं जिन्होंने जूनियर इंजीनियर के पद को त्याग कर के समाज की इस कुप्रथा को समाप्त करने का बीडा उठाया और साथ ही अपने सदग्रन्थों मे छिपे सदभक्ति के अनमोल मोक्षदायक मंत्रो को सभी समाज के सामने लाए और सदियों से चली आ रही गलत भक्ति से भी मुक्ति दिला रहे है।परम संत रामपाल जी महाराज हि वह दिव्य महापुरुष है। जिनके वर्तमान में करोड़ों अनुयायी संत के बताए गए मार्ग पर चल रहे हैं। और एक निर्मल समाज का निर्माण कर रहे हैं।
दहेज प्रथा का अंत
https://youtu.be/DS339gvDbz0


कोरोना का इलाज

संपूर्ण विश्व में वर्तमान में जो महामारी फैल रही है और लाखों जिंदगीयो को लील रही है।यह मनुष्य का द्वारा किए गए गलत कार्यों का ही परिणाम है।इस महामारी
को देखते हुए ऐसा लग रहा है की जो मनुष्य अपने आप को इतना ताकतवर और बलशाली समझ रहा था,वह उसका भ्रम था। प्रकृति का एक थपेड़े ने उसे आकाश की ऊंचाइयों से नीचे जमीन पर ला पटका है।इसके आगे मनुष्य असहाय,बेबस नजर आ रहा है । ऐसा लग रहा है इस कोराना नामक महामारी के आगे मनुष्य अपने घुटने टेक चुका है। प्रकृति का विधान है कि वह परमात्मा की बनाई इस सृष्टि को बराबर कर देती है। कुछ सालों पहले भी एक सुनामी नामक पर जल प्रलय
ने कई राष्ट्रों की लाखों मासूम जिंदगीयो को मौत के घाट उतार दिया था।तब भी प्रकृति ने अपना रौद्र रूप दिखाया था ।उससे भी सबक मनुष्य ने नहीं लिया, जिसका परिणाम आज संपूर्ण पृथ्वी कोरोना महामारी से कराह उठी है ।ऐसा भी नहीं है की इस महामारी का कोई इलाज नहीं है। विश्व की जितनी भी महामारिया हुई है उनका उपचार परमात्मा पहले ही बता दिया करते हैं। वर्तमान की महामारी का उपाय भी हमारे सद ग्रंथों में ही लिखा है।जिसमें बताया गया है कि पूर्ण परमात्मा जिसने इन सब सृष्टि की रचना की है उनकी शरण ग्रहण करने से हमें सभी प्रकार की आपदाओं, विपत्तियों तथा बीमारियों से सदैव रक्षा करते हैं। अथर्ववेद में लिखा है कि मनुष्य की आयु शेष ना रहने पर भी उसकी शरण ग्रहण कर ले तो भी वह परम अक्षर ब्रह्म
www.jagatgururampalji.orgअपने साधक की आयु 100 साल तक बढ़ा देता है ।अतः इस महामारी से बचने का सहज उपाय हमारे ग्रंथों में ही लिखा है । पूर्ण परमात्मा की सत भक्ति जिसे हम वर्तमान में इस महामारी से अपने और अपने समाज तथा देश को बचा सके।

भाई दुज

हमारे देश में प्रत्येक महीने में कोई ना कोई त्योहार मनाया जाता है। और प्रत्येक त्योहार आपसी रिश्ते से गहरे जुडे होते है। प्रत्येक पर्व बडे ह...