Wednesday, May 13, 2020

खराब शिक्षा व्यवस्था

वर्तमान समय में जिस तरह की शिक्षा व्यवस्था हमारे देश में चल रही है, वह कुछ हद तक संतोषजनक नहीं हैं। भारत की शिक्षा व्यवस्था में काफी बदलाव दिखे हैं परंतु कमियां भी उससे ज़्यादा दिखाई देती हैं।
किसी भी देश के विकास में शिक्षा का बहुत महत्व योगदान रहा है। हमारे देश के विकास में भी शिक्षा का महत्वपूर्ण  योगदान रहता है क्योंकि शिक्षा के बिना कुछ भी संभव नहीं है।
शिक्षा ही वह हथियार है जिससे देश का विकास सम्भव है और वर्तमान में जिस तरह की शिक्षा हमारे देश मे चल रही है उसमें सरकार को कुछ बदलाव लाने की ज़रूरत है। मौजूदा दौर में विशेष रूप से प्रारम्भिक शिक्षा पर ध्यान देने की ज़रूरत है ताकि बच्चों की नींव मज़बूत हो सके।
बच्चों की नींव मज़बूत रहने पर वे आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, आईपीएस, वैज्ञानिक तथा विभिन्न क्षेत्रों में उम्दा प्रदर्शन कर सकते हैं। भारत एक युवा देश है जहां की कुल आबादी में 65 प्रतिशत से ज़्यादा युवा हैं। 
प्रारंभिक शिक्षा के महत्व को देखते हुए अगर वर्तमान में चल रही व्यवस्था पर नज़र डाली जाए तब गाँवों के बच्चों को बहुत सारी सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। वर्तमान समय में गरीब बच्चों के लिए सरकार स्कूल तो मुहैया करा देती है लेकिन कई दफा पढ़ने के लिए उन्हें ज़रूरी सामग्रियां नहीं मिल पाती हैं। शहरों में भी सरकारी विधालयों की हालत कुछ ज्यादा सही नहीं कही जाा सकती हैं। और निजी विधालय मैं पढ़ाना हर किसी के बस की बात नहीं है आज वर्तमान में चाहे वह सरकारी विद्यालय हो निजी हो या सरकारी या निजी कोलेज सभी का एक ही उद्देश्य है शिक्षा के द्वारा व्यापार करना । जब शिक्षा को व्यापार बना देगें तो देश की  शिक्षा व्यवस्था  सही नहीं हो सकती।
देश के कई विद्यालय शिक्षकों की कमी से भी जूझ रहे हैं और कहीं पर विद्यार्थी नहीं आ पा रहे हैं यह भी एक बडा कारण हैं। कला शिक्षा व्यवस्था को सुधारने तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने कई प्रयास किए हैं तथा करोड़ों रुपए भी खर्च किए हैं जिनसे हालत ज्यादा सुधर नहीं पाए। शिक्षा का उद्देश्य युवा को समाज में रहने अथवा जीवन-यापन की कला में दीक्षित करना है। एकांत में रहकर ना तो व्यक्ति जीवन-यापन कर सकता है और ना ही पूर्णत: विकसित हो सकता है। इसके लिए प्रारंभिक शिक्षा से ही अंग्रेजों की शिक्षा पद्धति को हटाकर हमारे वेद पुराण गीता जी आदि का अध्ययन करवाया जाना चाहिए जिससे युवा अवस्था आने पर वह प्रत्येक गलत कार्य करने से पहले 10 बार सोचे ।अध्यात्मिक ज्ञान होने से वह गलत कार्य करने से डरेगा और आध्यात्म की ओर झुकाव होगा जिसे वह पूर्ण संत की खोज करेगा ।जिस प्रकार आज वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज के अनुयाई किसी भी प्रकार की बुराई नहीं करते हैं तथा औरों को भी गलत कार्य करने से रोकते हैं तथा सत भक्ति की शिक्षा बताकर उन्हें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा करते हैं। क्योंकि हमारे सद ग्रंथों में ऐसे गूढ़ ज्ञान है जिन्हें पढ़कर व्यक्ति गलत राह का त्याग कर देता है और भगवान से डरने लग जाता है। तो इस प्रकार जब देश के प्रत्येक बालक को प्रारंभ से ही हमारे सदग्रंथों का ज्ञान होगा तो अच्छी शिक्षा के साथ-साथ वह एक सभ्य और ईमानदार नागरिक बनेगा।
सदग्रन्थों को विस्तार से जानने के लिए यह आईए

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